जन की बात
आज फिर से तुमने बता दिया कि कोई तुम्हारे ऊपर भरोसा नहीं कर सकता है। तुम…
एक अंधेरी कोठर जिसमे, पल रही है नव आगंतुक। आद्र है तनमन आद्र है सब कुछ,…
जब भी ऊब जाता हूँ मै इस वर्तमान से, तो फिर से जीने अपना अतीत खोल…
चेहरे की उर्मियां मुँह पे झुर्रि हाथ में छुरी पैर में दुरी केवल गलियारें से जाते…